शुक्रवार, 1 अगस्त 2025

karvaan

अकेली है तो क्या हुआ आगे बढ़ पीछे मत देख
चलती जाना ये कारवां भी बनता जायेगा तुम्हारा
एक से दो हो गए अभी कदम बढाया ही तुमने 
और कुछ वक्त के बाद  ये बदला होगा सब नजारा
कम ही लोग कर पाते हैं साहस ऐसा 
शब्द नहीं हैं महसूश करता मैं कैसा

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