२४ जनवरी १९५६ के दिन मैंने अपनी मर्जी से अपना भूमिगत जीवन छोड़ दिया |पिछले १० वर्षों से मैं अन्डर ग्रा ऊंड था |घर वाले मेरी वापसी की उम्मीद छोड़ चुके थे |हालाँकि दीगर लोगों का कहना था मैं जरूर जिन्दा हूँ और एक दिन जरूर लौटूंगा और वाकई लौट भी आया था|पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उस छोटे और शांत से कसबे मुजफ्फरनगर में, हालाँकि वह जिला
मुख्यालय था , उस दिन पूरी गर्मजोशी से मेरा स्वागत करने के लिए हजारों की तादाद में किसान मजदूर और छात्र इकठ्ठा हुए थे |उन हैरान और जोशीले लोगों ने मुझे आगे करके पूरे कसबे में धूमधाम से जलूस निकाला और टाउन हाल पर पहुँच कर रूक गए | अब वे दिल ठानकर इस इंतजार में खड़े थे की मैं उन्हें अपनी अब तक की अन्डर ग्राउंड जिन्दगी के कुछ राज बताऊँ |
Comrade Major Jaipal ka photo and video urgently required, please help
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